श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  13.116.100 
फलं वा मूलकं हृत्वा अपूपं वा पिपीलिका:।
चोरयित्वा च निष्पावं जायते हलगोलक:॥ १००॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई मनुष्य फल, मूल या मटर चुराता है, तो उसे चींटी की योनि में जन्म लेना पड़ता है। जो अनाज (मटर या उड़द) चुराता है, वह हलगोलक नामक कीड़ा है।॥100॥
 
If a person steals fruit, roots or peas, he has to take birth in the womb of an ant. The one who steals bare grains (peas or black gram) is a worm called Halgolaka.॥100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)