श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 116: बृहस्पतिका युधिष्ठिरसे प्राणियोंके जन्मके प्रकारका और नानाविध पापोंके फलस्वरूप नरकादिकी प्राप्ति एवं तिर्यग्योनियोंमें जन्म लेनेका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.116.1 
युधिष्ठिर उवाच
पितामह महाप्राज्ञ सर्वशास्त्रविशारद।
श्रोतुमिच्छामि मर्त्यानां संसारविधिमुत्तमम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे सम्पूर्ण शास्त्रों के ज्ञाता, बुद्धिमान पितामह! अब मैं मनुष्यों के लिए संसार-यात्रा के निर्वाह हेतु सर्वोत्तम उपाय के विषय में सुनना चाहता हूँ। 1॥
 
Yudhishthir said – O wise grandfather, adept in the knowledge of the entire scriptures! Now I want to hear about the best way for humans to survive their worldly journey. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)