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mahabharat 13.115.5: नाभि में पूर्वाभाद्रपद और उत्तराभाद्रपद, नेत्र मंडल में रेवती, पृष्ठ भाग में धनिष्ठा, अनुराधा और उत्तरा को जानें। 5॥   |   mahabharat अध्याय 13.115: रूप-सौन्दर्य और लोकप्रियताकी प्राप्तिके लिये मार्गशीर्षमासमें चन्द्र-व्रत करनेका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.115.5 
नाभिं भाद्रपदे विद्याद् रेवत्यामक्षिमण्डलम्।
पृष्ठमेव धनिष्ठासु अनुराधोत्तरास्तथा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
नाभि में पूर्वाभाद्रपद और उत्तराभाद्रपद, नेत्र मंडल में रेवती, पृष्ठ भाग में धनिष्ठा, अनुराधा और उत्तरा को जानें। 5॥
 
Know Purvabhadrapada and Uttarabhadrapada in the navel, Revati in the eye circle, Dhanishtha, Anuradha and Uttara in the back. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)