Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.115.3: भीष्मजी बोले - राजेन्द्र! मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को जब चन्द्रमा मूल नक्षत्र से युक्त हो, तब चन्द्र संबंधी व्रत का आरम्भ करो। इस प्रकार चन्द्रमा के स्वरूप का चिंतन करना चाहिए। देवता सहित मूल नक्षत्र द्वारा उन दोनों के चरणों का अनुभव करो और उनकी पिंडलियों में रोहिणी को स्थापित करो।॥3॥ | mahabharat अध्याय 13.115: रूप-सौन्दर्य और लोकप्रियताकी प्राप्तिके लिये मार्गशीर्षमासमें चन्द्र-व्रत करनेका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्मजी बोले - राजेन्द्र! मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को जब चन्द्रमा मूल नक्षत्र से युक्त हो, तब चन्द्र संबंधी व्रत का आरम्भ करो। इस प्रकार चन्द्रमा के स्वरूप का चिंतन करना चाहिए। देवता सहित मूल नक्षत्र द्वारा उन दोनों के चरणों का अनुभव करो और उनकी पिंडलियों में रोहिणी को स्थापित करो।॥3॥
Bhishmaji said – Rajendra! On the Pratipada of Shukla Paksha of Margashirsha month, start the moon related fast when the Moon is in conjunction with Moola Nakshatra. The form of the moon should be contemplated in this way. Along with the deity, feel the feet of both of them through Mool Nakshatra and install Rohini in their calves. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥