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mahabharat 13.114.3: मार्गशीर्ष मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके भगवान केशव की पूजा करने से मनुष्य को अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है और उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। 3॥   |   mahabharat अध्याय 13.114: प्रत्येक मासकी द्वादशी तिथिको उपवास और भगवान‍् विष्णुकी पूजा करनेका विशेष माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.114.3 
द्वादश्यां मार्गशीर्षे तु अहोरात्रेण केशवम्।
अर्च्याश्वमेधं प्राप्नोति दुष्कृतं चास्य नश्यति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
मार्गशीर्ष मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके भगवान केशव की पूजा करने से मनुष्य को अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है और उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। 3॥
 
By fasting day and night on Dwadashi Tithi in Margashirsha month and worshiping Lord Keshav, a person gets the results of Ashwamedha Yagya and all his sins are destroyed. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)