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mahabharat 13.114.2: भीष्म बोले, "हे राजन! इस विषय में स्वयंभू भगवान विष्णु ने जो कुछ कहा है, उसे मैं तुमसे कहता हूँ। सुनो। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस अनुष्ठान को करने से मनुष्य परम सुखी हो जाता है।"   |   mahabharat अध्याय 13.114: प्रत्येक मासकी द्वादशी तिथिको उपवास और भगवान‍् विष्णुकी पूजा करनेका विशेष माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 114: प्रत्येक मासकी द्वादशी तिथिको उपवास और भगवान‍् विष्णुकी पूजा करनेका विशेष माहात्म्य  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.114.2 
भीष्म उवाच
शृणु राजन् यथा गीतं स्वयमेव स्वयम्भुवा।
यत् कृत्वा निर्वृतो भूयात् पुरुषो नात्र संशय:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे राजन! इस विषय में स्वयंभू भगवान विष्णु ने जो कुछ कहा है, उसे मैं तुमसे कहता हूँ। सुनो। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस अनुष्ठान को करने से मनुष्य परम सुखी हो जाता है।"
 
Bhishma said, "O King! I am telling you what the self-born Lord Vishnu has said on this subject. Listen. There is no doubt that by performing this ritual a man becomes extremely happy."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)