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mahabharat 13.114.11: जो मनुष्य श्रावण मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके भगवान श्रीधर की पूजा करता है, वह पाँच महायज्ञों का फल प्राप्त करता है और विमान में बैठकर सुख भोगता है ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 13.114: प्रत्येक मासकी द्वादशी तिथिको उपवास और भगवान‍् विष्णुकी पूजा करनेका विशेष माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.114.11 
अहोरात्रेण द्वादश्यां श्रावणे मासि श्रीधरम्।
पञ्चयज्ञानवाप्नोति विमानस्थश्च मोदते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य श्रावण मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके भगवान श्रीधर की पूजा करता है, वह पाँच महायज्ञों का फल प्राप्त करता है और विमान में बैठकर सुख भोगता है ॥11॥
 
One who worships Lord Shridhar by fasting day and night on the Dwadashi Tithi of the month of Shravan, obtains the fruits of the five great yajnas and enjoys happiness sitting in an aeroplane. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)