श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 114: प्रत्येक मासकी द्वादशी तिथिको उपवास और भगवान‍् विष्णुकी पूजा करनेका विशेष माहात्म्य  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.114.1 
युधिष्ठिर उवाच
सर्वेषामुपवासानां यच्छ्रेय: सुमहत्फलम्।
यच्चाप्यसंशयं लोके तन्मे त्वं वक्तुमर्हसि॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "पितामह! आप कृपा करके मुझे वह व्रत बताइए जो सबसे उत्तम, सबसे अधिक फल देने वाला तथा जिसके विषय में मनुष्यों को कोई संदेह न हो।" ॥1॥
 
Yudhishthira said, "Grandfather! Of all the fasts, please tell me the one which is the best and gives the greatest results and about which people have no doubts." ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)