| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 113: मानस तथा पार्थिव तीर्थकी महत्ता » श्लोक 19 |
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| | | | श्लोक 13.113.19  | मनसश्च पृथिव्याश्च पुण्यास्तीर्थास्तथापरे।
उभयोरेव य: स्नायात् स सिद्धिं शीघ्रमाप्नुयात्॥ १९॥ | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार पृथ्वी पर और मन में अनेक पवित्र तीर्थ हैं। जो इन दोनों प्रकार के तीर्थों में स्नान करता है, वह शीघ्र ही भगवान् को प्राप्त करने की सिद्धि प्राप्त कर लेता है॥19॥ | | | | In this way, there are many holy pilgrimage places on earth and in the mind. One who bathes in both these types of pilgrimage places, soon attains the success of attaining God.॥ 19॥ | | ✨ ai-generated | | |
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