| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 113: मानस तथा पार्थिव तीर्थकी महत्ता » श्लोक 16 |
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| | | | श्लोक 13.113.16  | शरीरस्य यथोद्देशा: शुचय: परिकीर्तिता:।
तथा पृथिव्या भागाश्च पुण्यानि सलिलानि च॥ १६॥ | | | | | | अनुवाद | | जैसे शरीर के विभिन्न अंग पवित्र हैं, वैसे ही पृथ्वी के विभिन्न भाग पवित्र तीर्थ हैं और वहाँ का जल पवित्र है॥16॥ | | | | Just as various parts of the body are sacred, similarly various parts of the earth are sacred pilgrimage sites and the water there is sacred.॥ 16॥ | | ✨ ai-generated | | |
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