श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 113: मानस तथा पार्थिव तीर्थकी महत्ता  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.113.15 
शरीरस्थानि तीर्थानि प्रोक्तान्येतानि भारत।
पृथिव्यां यानि तीर्थानि पुण्यानि शृणु तान्यपि॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! मैंने शरीर में स्थित तीर्थों का वर्णन किया है; अब पृथ्वी पर स्थित तीर्थों का माहात्म्य सुनो॥15॥
 
O Bharata! I have described the holy places situated in the body; now listen to the importance of the holy places situated on the earth. ॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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