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mahabharat 13.112.99-100: जो संयमित आहार करता हुआ, लगातार बारह महीनों तक अपनी इन्द्रियों को वश में करके, तेईसवें दिन एक बार भोजन करता है, वह वायु, शुक्राचार्य और रुद्र के लोक में जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.99-100 
त्रयोविंशे तु दिवसे प्राशेद् यस्त्वेकभोजनम्॥ ९९॥
सदा द्वादशमासांस्तु मिताहारो जितेन्द्रिय:।
वायोरुशनसश्चैव रुद्रलोकं च गच्छति॥ १००॥
 
 
अनुवाद
जो संयमित आहार करता हुआ, लगातार बारह महीनों तक अपनी इन्द्रियों को वश में करके, तेईसवें दिन एक बार भोजन करता है, वह वायु, शुक्राचार्य और रुद्र के लोक में जाता है।
 
He who, being a moderate eater and controlling his senses for twelve consecutive months, eats once on the twenty-third day, goes to the world of Vayu, Shukracharya and Rudra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)