Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.112.96-99h: जो बारह महीनों तक प्रतिदिन अग्निहोत्र करता है और बाईसवें दिन एक बार भोजन करता है, अहिंसा परायण, बुद्धिमान, सत्यवादी और दोष-निषेधक है, वह सूर्य के समान तेजस्वी रूप धारण करके विशाल विमान पर सवार होकर वसुओं के लोक में जाता है। वहाँ वह इच्छानुसार विचरण करता है, अमृतपान करता है, दिव्य आभूषणों से अलंकृत होता है और देवकन्याओं का भोग करता है। | mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो बारह महीनों तक प्रतिदिन अग्निहोत्र करता है और बाईसवें दिन एक बार भोजन करता है, अहिंसा परायण, बुद्धिमान, सत्यवादी और दोष-निषेधक है, वह सूर्य के समान तेजस्वी रूप धारण करके विशाल विमान पर सवार होकर वसुओं के लोक में जाता है। वहाँ वह इच्छानुसार विचरण करता है, अमृतपान करता है, दिव्य आभूषणों से अलंकृत होता है और देवकन्याओं का भोग करता है।
He who performs Agnihotra every day for twelve months and eats once on the twenty-second day, is devoted to non-violence, is intelligent, truthful and free from fault-finding, assumes a radiant form like the Sun and rides on a great plane to go to the world of the Vasus. There he roams around as per his wish, drinks Amrit and adorns himself with divine ornaments and enjoys the company of the celestial maidens.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥