श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 92-93h
 
 
श्लोक  13.112.92-93h 
गन्धर्वैरप्सरोभिश्च दिव्यमाल्यानुलेपनै:॥ ९२॥
विमानै: काञ्चनैर्हृद्यै: पृष्ठतश्चानुगम्यते।
 
 
अनुवाद
उसके पीछे सुन्दर स्वर्ण विमान चल रहे हैं, जिनकी सेवा में दिव्य माला और लेप पहने हुए गन्धर्व और अप्सराएँ चल रही हैं।
 
Behind him follow beautiful golden aircrafts, served by Gandharvas and Apsaras wearing divine garlands and ointments. 92 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)