Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.112.90-92h: जो मनुष्य बारह महीनों तक निरन्तर बीस दिन में एक बार भोजन करता है, सत्य बोलता है, व्रत रखता है, मांस नहीं खाता, ब्रह्मचर्य का पालन करता है और समस्त प्राणियों की सहायता करने में तत्पर रहता है, वह सूर्यदेव के विशाल एवं सुन्दर लोकों को जाता है ॥90-91 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 90-92h
 
 
श्लोक  13.112.90-92h 
पूर्णेऽथ विंशे दिवसे यो भुङ्‍‍क्ते ह्येकभोजनम्॥ ९०॥
सदा द्वादशमासांस्तु सत्यवादी धृतव्रत:।
अमांसाशी ब्रह्मचारी सर्वभूतहिते रत:॥ ९१॥
स लोकान् विपुलान् रम्यानादित्यानामुपाश्नुते।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य बारह महीनों तक निरन्तर बीस दिन में एक बार भोजन करता है, सत्य बोलता है, व्रत रखता है, मांस नहीं खाता, ब्रह्मचर्य का पालन करता है और समस्त प्राणियों की सहायता करने में तत्पर रहता है, वह सूर्यदेव के विशाल एवं सुन्दर लोकों को जाता है ॥90-91 1/2॥
 
He who eats once every twenty days for twelve months continuously, speaks the truth, observes fasts, does not eat meat, practices celibacy and is ready to help all creatures, goes to the vast and beautiful worlds of the Sun God. ॥90-91 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)