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श्लोक  13.112.89-90h 
तत्रामरवरस्त्रीभिर्मोदते विगतज्वर:॥ ८९॥
दिव्याम्बरधर: श्रीमानयुतानां शतं शतम्।
 
 
अनुवाद
उस लोक में वह सुन्दरी अप्सराओं का भोग करता है। उसे किसी प्रकार की चिंता या रोग नहीं सताता। दिव्य वस्त्र धारण करके तथा धनवान होकर वह दस करोड़ वर्षों तक वहाँ निवास करता है।
 
In that plane he enjoys the company of beautiful celestial nymphs. He is not troubled by any worries or diseases. Wearing divine clothes and having a wealthy appearance, he lives there for ten crore years. 89 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)