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mahabharat 13.112.83-84h: जो मनुष्य लगातार बारह महीनों तक हर अठारहवें दिन एक बार भोजन करता है, वह पृथ्वी सहित सातों लोकों को देखता है।   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.83-84h 
अष्टादशे यो दिवसे प्राश्नीयादेकभोजनम्॥ ८३॥
सदा द्वादशमासान् वै सप्तलोकान् स पश्यति।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य लगातार बारह महीनों तक हर अठारहवें दिन एक बार भोजन करता है, वह पृथ्वी सहित सातों लोकों को देखता है।
 
He who eats once every eighteenth day for twelve consecutive months, sees the seven worlds including the Earth. 83 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)