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mahabharat 13.112.81-82h: वह पुरुष वहाँ भूर्लोक, भुवर्लोक और देवर्षिका को जगत् रूप में देखता है और देवाधिदेव की कन्याएँ उसका मनोरंजन करती हैं। उनकी संख्या बत्तीस है। वे सुन्दर रूप वाली, मधुर वाणी वाली और दिव्य आभूषणों से विभूषित हैं। 81 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 81-82h
 
 
श्लोक  13.112.81-82h 
भूर्भुवं चापि देवर्षिं विश्वरूपमवेक्षते।
तत्र देवाधिदेवस्य कुमार्यो रमयन्ति तम्॥ ८१॥
द्वात्रिंशद् रूपधारिण्यो मधुरा: समलंकृता:।
 
 
अनुवाद
वह पुरुष वहाँ भूर्लोक, भुवर्लोक और देवर्षिका को जगत् रूप में देखता है और देवाधिदेव की कन्याएँ उसका मनोरंजन करती हैं। उनकी संख्या बत्तीस है। वे सुन्दर रूप वाली, मधुर वाणी वाली और दिव्य आभूषणों से विभूषित हैं। 81 1/2॥
 
That man sees Bhurlok, Bhuvarlok and Devarshika in the world form there and the girls of Devadhideva entertain him. Their number is thirty-two. She has a beautiful appearance, sweet speech and is adorned with divine ornaments. 81 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)