Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.112.8-9h: वह पुरुष तपे हुए सोने के समान चमकीला विमान पाता है और नृत्य और गान से शोभायमान होकर अग्नि के समान तेजस्वी देवियों के महल में एक हजार वर्षों तक प्रजापतिलोक में निवास करता है ॥8 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  13.112.8-9h 
तप्तकाञ्चनवर्णं च विमानं लभते नर:।
देवस्त्रीणामधीवासे नृत्यगीतनिनादिते॥ ८॥
प्राजापत्ये वसेत् पद्मं वर्षाणामग्निसंनिभे।
 
 
अनुवाद
वह पुरुष तपे हुए सोने के समान चमकीला विमान पाता है और नृत्य और गान से शोभायमान होकर अग्नि के समान तेजस्वी देवियों के महल में एक हजार वर्षों तक प्रजापतिलोक में निवास करता है ॥8 1/2॥
 
That man finds a plane as bright as heated gold and resides in the Prajapatilok, resplendent with dances and songs, for a thousand years in the palace of the goddesses, as bright as fire. 8 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)