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श्लोक  13.112.76-77h 
सुदर्शनाभिर्नारीभिर्मधुराभिस्तथैव च॥ ७६॥
अर्च्यते वै विमानस्थ: कामभोगैश्च सेव्यते।
 
 
अनुवाद
वह विमान पर विराजमान है और अत्यंत सुंदर तथा मधुरभाषी दिव्य स्त्रियां उसकी पूजा करती हैं तथा उसे भोग प्रदान करती हैं।
 
He sits on the plane and divine women, extremely beautiful to look at and sweet-spoken, worship him and provide him with sexual pleasures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)