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mahabharat 13.112.72: उस विमान में केवल एक ही स्तंभ है और चार द्वार हैं। सात पंखों वाला वह परम शुभ विमान सहस्त्रों वैजयंती ध्वजों से सुशोभित है और गीतों की मधुर ध्वनि से व्याप्त है।   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.72 
एकस्तम्भं चतुर्द्वारं सप्तभौमं सुमंगलम्।
वैजयन्तीसहस्रैश्च शोभितं गीतनि:स्वनै:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
उस विमान में केवल एक ही स्तंभ है और चार द्वार हैं। सात पंखों वाला वह परम शुभ विमान सहस्त्रों वैजयंती ध्वजों से सुशोभित है और गीतों की मधुर ध्वनि से व्याप्त है।
 
There is only one pillar in that plane and there are four doors. That most auspicious plane with seven wings is decorated with thousands of Vaijayanti flags and is spread with the sweet sound of songs.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)