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mahabharat 13.112.68: वह मनुष्य उतने वर्षों तक देवकन्याओं के धाम में निवास करता है, जितने वर्षों तक गंगा में रेत के कण होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.68 
देवकन्यानिवासे च तस्मिन् वसति मानव:।
जाह्नवीवालुकाकीर्णं पूर्णं संवत्सरं नर:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
वह मनुष्य उतने वर्षों तक देवकन्याओं के धाम में निवास करता है, जितने वर्षों तक गंगा में रेत के कण होते हैं।
 
That human being resides in the abode of the celestial maidens for as many years as there are grains of sand in the Ganges.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)