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mahabharat 13.112.66: वे देवकन्याएँ, जिनका यौवन और सौन्दर्य वर्णन योग्य नहीं है, शुद्ध सोने के कंगन और अन्य आभूषण धारण करके, विमान में सवार होकर उस पुरुष की सेवा में आती हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.66 
अनिर्देश्यवयोरूपा देवकन्या: स्वलंकृता:।
मृष्टतप्तांगदधरा विमानैरुपयान्ति तम्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
वे देवकन्याएँ, जिनका यौवन और सौन्दर्य वर्णन योग्य नहीं है, शुद्ध सोने के कंगन और अन्य आभूषण धारण करके, विमान में सवार होकर उस पुरुष की सेवा में आती हैं।
 
Those celestial maidens, whose youth and beauty cannot be described, wearing bracelets and other ornaments made of pure gold, come in the service of that man in aircrafts. 66.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)