श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  13.112.65 
चतुर्दशे तु दिवसे य: पूर्णे प्राशते हवि:।
सदा द्वादशमासांस्तु महामेधफलं लभेत्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति बारह महीनों तक प्रति चौदहवें दिन हविष्यान्न का सेवन करता है, उसे महामेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
 
He who eats Havishyaanna every fourteenth day for twelve months obtains the fruits of the Mahamedha Yagna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)