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mahabharat 13.112.63: जो मनुष्य इस व्रत को करता है, वह दो शंख, दो ध्वज (महापद्म), एक कल्प, एक चतुर्युग तथा दस करोड़ चार पद्म वर्ष तक ब्रह्मलोक में निवास करता है॥ 63॥   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.63 
तत्र शंखपताके द्वे युगान्तं कल्पमेव च।
अयुतायुतं तथा पद्मं समुद्रं च तथा वसेत्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य इस व्रत को करता है, वह दो शंख, दो ध्वज (महापद्म), एक कल्प, एक चतुर्युग तथा दस करोड़ चार पद्म वर्ष तक ब्रह्मलोक में निवास करता है॥ 63॥
 
The person who observes the vow resides in Brahmloka for two conches, two flags (mahapadma), one kalpa and one chaturyuga and ten crore and four padma years.॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)