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mahabharat 13.112.61-62: उस व्यक्ति को रक्तपद्मोदय नामक विमान प्राप्त होता है, जो सुवर्ण से जड़ित तथा अनेक रत्नों से विभूषित होता है। वह दिव्य कुमारियों से युक्त होता है। दिव्य आभूषणों से विभूषित वह विमान अत्यंत सुंदर होता है। उसमें से पवित्र सुगन्ध निकलती रहती है तथा वह दिव्य विमान वायव्यास्त्र से सुशोभित होता है। 61-62   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.61-62 
रक्तपद्मोदयं नाम विमानं साधयेन्नर:।
जातरूपप्रयुक्तं च रत्नसंचयभूषितम्॥ ६१॥
देवकन्याभिराकीर्णं दिव्याभरणभूषितम्।
पुण्यगन्धोदयं दिव्यं वायव्यैरुपशोभितम्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
उस व्यक्ति को रक्तपद्मोदय नामक विमान प्राप्त होता है, जो सुवर्ण से जड़ित तथा अनेक रत्नों से विभूषित होता है। वह दिव्य कुमारियों से युक्त होता है। दिव्य आभूषणों से विभूषित वह विमान अत्यंत सुंदर होता है। उसमें से पवित्र सुगन्ध निकलती रहती है तथा वह दिव्य विमान वायव्यास्त्र से सुशोभित होता है। 61-62
 
That person gets a plane called Raktapadmodaya, which is studded with gold and decorated with a lot of gems. It is filled with celestial maidens, that plane decorated with divine ornaments is very beautiful. A sacred fragrance keeps on emanating from it and that divine plane is decorated with Vayavyastra. 61-62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)