Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.112.60: जो मनुष्य बारह महीनों तक तेरहवें दिन हविष्यान्न का सेवन करता है, उसे देवसत्र का फल प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  13.112.60 
त्रयोदशे तु दिवसे प्राप्ते य: प्राशते हवि:।
सदा द्वादशमासान् वै देवसत्रफलं लभेत्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य बारह महीनों तक तेरहवें दिन हविष्यान्न का सेवन करता है, उसे देवसत्र का फल प्राप्त होता है।
 
He who always eats Havishyaan on the thirteenth day for twelve months, obtains the fruits of Devsatra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)