Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.112.55-56h: जो मनुष्य बारह महीनों तक प्रति बारहवें दिन केवल हविष्यान्न का सेवन करता है, उसे सर्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  13.112.55-56h 
दिवसे द्वादशे यस्तु प्राप्ते वै प्राशते हवि:॥ ५५॥
सदा द्वादशमासान् वै सर्वमेधफलं लभेत्।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य बारह महीनों तक प्रति बारहवें दिन केवल हविष्यान्न का सेवन करता है, उसे सर्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
 
He who consumes only Havishyaan every twelfth day for twelve months obtains the fruit of a Sarvamedha Yagna. 55 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)