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mahabharat 13.112.52-53h: वह ब्रह्माजी द्वारा भेजे गए विमान को स्वतः ही अपने सामने प्रकट होते देखता है। स्वर्णवर्णी सुन्दर युवतियाँ उसे उस विमान में बिठाकर स्वर्ग के दिव्य एवं मनोहर रुद्र लोक में ले जाती हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.52-53h 
स्वायम्भुवं च पश्येत विमानं समुपस्थितम्।
कुमार्य: काञ्चनाभासा रूपवत्यो नयन्ति तम्॥ ५२॥
रुद्राणां तमधीवासं दिवि दिव्यं मनोहरम्।
 
 
अनुवाद
वह ब्रह्माजी द्वारा भेजे गए विमान को स्वतः ही अपने सामने प्रकट होते देखता है। स्वर्णवर्णी सुन्दर युवतियाँ उसे उस विमान में बिठाकर स्वर्ग के दिव्य एवं मनोहर रुद्र लोक में ले जाती हैं।
 
He sees the plane sent by Lord Brahma appearing before him automatically. The beautiful maidens with golden colour take him in that plane to the divine and beautiful Rudra Lok in the heaven. 52 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)