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mahabharat 13.112.39-40: जो मनुष्य एक वर्ष तक नौ दिन तक प्रतिदिन एक बार भोजन करता है और बारह महीनों तक प्रतिदिन अग्नि में आहुति देता है, उसे एक हजार अश्वमेध यज्ञों का उत्तम फल प्राप्त होता है॥ 39-40॥   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.39-40 
यस्तु संवत्सरं भुङ्‍‍क्ते नवमे नवमेऽहनि॥ ३९॥
सदा द्वादशमासान् वै जुह्वानो जातवेदसम्।
अश्वमेधसहस्रस्य फलं प्राप्नोत्यनुत्तमम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य एक वर्ष तक नौ दिन तक प्रतिदिन एक बार भोजन करता है और बारह महीनों तक प्रतिदिन अग्नि में आहुति देता है, उसे एक हजार अश्वमेध यज्ञों का उत्तम फल प्राप्त होता है॥ 39-40॥
 
He who eats once a day for nine days for a year and offers oblations into the fire every day for twelve months, obtains the most excellent result of one thousand Ashwamedha Yagnas.॥ 39-40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)