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mahabharat 13.112.28-30h: उसे स्वर्ण से विभूषित, अग्नि की ज्वाला के समान चमकता हुआ, हंसों और मोरों द्वारा सेवित एक उत्तम विमान मिलता है। अप्सराओं की गोद में शयन के पश्चात्, वह अप्सराओं की टाप-टाप और पायल की मधुर ध्वनि से जागता है।   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.28-30h 
अग्निज्वालासमाभासं हंसबर्हिणसेवितम्॥ २८॥
शातकुम्भसमायुक्तं साधयेद् यानमुत्तमम्।
तथैवाप्सरसामङ्के प्रतिसुप्त: प्रबोध्यते॥ २९॥
नूपुराणां निनादेन मेखलानां च नि:स्वनै:।
 
 
अनुवाद
उसे स्वर्ण से विभूषित, अग्नि की ज्वाला के समान चमकता हुआ, हंसों और मोरों द्वारा सेवित एक उत्तम विमान मिलता है। अप्सराओं की गोद में शयन के पश्चात्, वह अप्सराओं की टाप-टाप और पायल की मधुर ध्वनि से जागता है।
 
He gets an excellent plane decorated with gold, shining like the flames of fire, served by swans and peacocks. After sleeping in the lap of the Apsaras, he is awakened by their shuffling movements and the sweet sound of their anklets.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)