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mahabharat 13.112.24-26h: वह जम्बूण्ड नामक स्वर्ण निर्मित तथा सूर्य की किरणों के समान चमकने वाले हंस के समान दिव्य विमान पर सवार होकर स्वर्ग में चार, बारह और पैंतीस (कुल इक्यावन) कमल वर्षों तक सुखपूर्वक निवास करता है।॥ 24-25 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.24-26h 
जाम्बूनदमयं दिव्यं विमानं हंसलक्षणम्॥ २४॥
सूर्यमालासमाभासमारोहेत् पाण्डुरं गृहम्।
आवर्तनानि चत्वारि तथा पद्मानि द्वादश॥ २५॥
शराग्निपरिमाणं च तत्रासौ वसते सुखम्।
 
 
अनुवाद
वह जम्बूण्ड नामक स्वर्ण निर्मित तथा सूर्य की किरणों के समान चमकने वाले हंस के समान दिव्य विमान पर सवार होकर स्वर्ग में चार, बारह और पैंतीस (कुल इक्यावन) कमल वर्षों तक सुखपूर्वक निवास करता है।॥ 24-25 1/2॥
 
He rides on a swan-like divine aircraft made of gold called Jambuṇḍa and shining like the rays of the sun, and lives happily in the heaven for four, twelve and thirty-five (totaling fifty-one) lotus years.॥ 24-25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)