Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.112.129-130h: वह दिव्य माला, दिव्य वस्त्र, दिव्य सुगंध और दिव्य अभिषेक धारण करके, भोगों की शक्ति और साधनों से संपन्न होकर, भोगों में लीन रहता है। उसे कभी दुःख नहीं होता॥129 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह दिव्य माला, दिव्य वस्त्र, दिव्य सुगंध और दिव्य अभिषेक धारण करके, भोगों की शक्ति और साधनों से संपन्न होकर, भोगों में लीन रहता है। उसे कभी दुःख नहीं होता॥129 1/2॥
Wearing divine garlands, divine clothes, divine fragrance and divine anointment, he is endowed with the power and means of enjoyment and remains absorbed in pleasures. He never experiences sorrows.॥ 129 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥