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mahabharat 13.112.127-128h: जो मनुष्य बारह महीनों तक प्रत्येक माह के तीसवें दिन एक बार भोजन करता है और सदैव शान्त रहता है, वह ब्रह्मलोक को प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.127-128h 
यस्तु मासे गते भुङ्‍‍क्ते एकभक्तं शमात्मक:॥ १२७॥
सदा द्वादशमासान् वै ब्रह्मलोकमवाप्नुयात्।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य बारह महीनों तक प्रत्येक माह के तीसवें दिन एक बार भोजन करता है और सदैव शान्त रहता है, वह ब्रह्मलोक को प्राप्त होता है।
 
He who eats once a day on the thirtieth day after every month for twelve months and remains always calm, attains Brahmaloka. 127 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)