श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 121-122
 
 
श्लोक  13.112.121-122 
एकोनत्रिंशे दिवसे य: प्राशेदेकभोजनम्॥ १२१॥
सदा द्वादशमासान् वै सत्यव्रतपरायण:।
तस्य लोका: शुभा दिव्या देवराजर्षिपूजिता:॥ १२२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य बारह महीने तक सत्य व्रत का पालन करता है और उनतीसवें दिन एक बार भोजन करता है, वह ऋषियों और राजाओं द्वारा पूजित दिव्य एवं शुभ लोक को प्राप्त होता है ॥121-122॥
 
He who is devoted to the vow of truth for twelve months and eats a single meal on the twenty-nineth day, attains the divine and auspicious world worshipped by the sages and kings. ॥121-122॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)