श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.112.12 
पाण्डुराभ्रप्रतीकाशे विमाने हंसलक्षणे।
द्वे समाप्ते तत: पद्मे सोऽप्सरोभिर्वसेत् सह॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वे श्वेत मेघों के समान चमकने वाले हंसरूपी विमान पर विराजमान होते हैं और वहाँ अप्सराओं के साथ दो लाख वर्षों तक, काल के अंत तक रहते हैं॥12॥
 
He sits on a swan-like plane shining like white clouds and stays there with the Apsaras for two million years until the end of the time.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)