Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.112.119-121h: वह भोगों से युक्त होकर अपने तेज से शुद्ध सूर्य के समान प्रकाशित होता है और सुन्दर वर्ण, विशाल वक्ष, जंघा और जघन-प्रदेश वाली सुकुमार स्त्रियाँ दिव्य वस्त्राभूषणों से विभूषित होकर सूर्य के समान प्रकाशित होने वाले सुन्दर दिव्य विमान पर बैठकर समस्त कामनाओं की पूर्ति करने वाली उस पुण्यात्मा पुरुष का दस लाख कल्पों तक सत्कार करती हैं। | mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह भोगों से युक्त होकर अपने तेज से शुद्ध सूर्य के समान प्रकाशित होता है और सुन्दर वर्ण, विशाल वक्ष, जंघा और जघन-प्रदेश वाली सुकुमार स्त्रियाँ दिव्य वस्त्राभूषणों से विभूषित होकर सूर्य के समान प्रकाशित होने वाले सुन्दर दिव्य विमान पर बैठकर समस्त कामनाओं की पूर्ति करने वाली उस पुण्यात्मा पुरुष का दस लाख कल्पों तक सत्कार करती हैं।
Endowed with enjoyments, he shines like the pure Sun with his brilliance and the delicate ladies with beautiful complexion, big breasts, thighs and pubic region, adorned with divine clothes and ornaments, sitting on the beautiful divine plane shining like the Sun and granting the fulfillment of all desires, entertain that virtuous man for ten lakh Kalpas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥