Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.112.115-117h: वहाँ वह अमृत का भोजन प्राप्त करता है और निष्काम भाव से जीवन का आनंद उठाता है। हे राजन! वह दिव्य रूप वाला पुरुष राजाओं द्वारा वर्णित ऋषियों के चरित्र का श्रवण और मनन करता है तथा उत्तम विमान पर सवार होकर मदमस्त होकर सुन्दर स्त्रियों का संग करता है और वहाँ तीन हजार युग और कल्पों तक सुखपूर्वक निवास करता है। 115-116 1/2। | mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ वह अमृत का भोजन प्राप्त करता है और निष्काम भाव से जीवन का आनंद उठाता है। हे राजन! वह दिव्य रूप वाला पुरुष राजाओं द्वारा वर्णित ऋषियों के चरित्र का श्रवण और मनन करता है तथा उत्तम विमान पर सवार होकर मदमस्त होकर सुन्दर स्त्रियों का संग करता है और वहाँ तीन हजार युग और कल्पों तक सुखपूर्वक निवास करता है। 115-116 1/2।
There he gets the food of nectar and enjoys his life without any desire. O King! That divinely-formed man listens to and contemplates the character of the sages described by the kings and, riding on an excellent plane, enjoys the company of beautiful women in a state of intoxication and lives there happily for three thousand Yugas and Kalpas. 115-116 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥