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mahabharat 13.112.106-107: उसके पीछे सिंह और व्याघ्र से जुते हुए अनेक रथ, मेघों की गर्जना से गूँजते हुए, विजयघोष करते हुए आगे बढ़ते हैं। उन सुवर्णमय, पवित्र और शुभ रथों पर देवियाँ सवार होकर चलती हैं ॥106-107॥   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.106-107 
सिंहव्याघ्रप्रयुक्तैस्तु मेघनि:स्वननादितै:॥ १०६॥
स रथैर्नन्दिघोषैश्च पृष्ठतो ह्यनुगम्यते।
देवकन्यासमारूढै: काञ्चनैर्विमलै: शुभै:॥ १०७॥
 
 
अनुवाद
उसके पीछे सिंह और व्याघ्र से जुते हुए अनेक रथ, मेघों की गर्जना से गूँजते हुए, विजयघोष करते हुए आगे बढ़ते हैं। उन सुवर्णमय, पवित्र और शुभ रथों पर देवियाँ सवार होकर चलती हैं ॥106-107॥
 
Behind him, numerous chariots harnessed to lions and tigers and resounding with the thunderous roar of the clouds move forward, shouting victory. Goddesses ride on those golden, pure and auspicious chariots. 106-107॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)