Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.112.102-104h: जो मनुष्य दिव्य माला, दिव्य वस्त्र, दिव्य गंध और दिव्य अभिषेक धारण करके बारह महीनों तक अग्निहोत्र करता है और चौबीसवें दिन एक बार हविष्यान्न का भोजन करता है, वह दीर्घकाल तक आदित्यलोक में सुखपूर्वक निवास करता है॥102-103 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य दिव्य माला, दिव्य वस्त्र, दिव्य गंध और दिव्य अभिषेक धारण करके बारह महीनों तक अग्निहोत्र करता है और चौबीसवें दिन एक बार हविष्यान्न का भोजन करता है, वह दीर्घकाल तक आदित्यलोक में सुखपूर्वक निवास करता है॥102-103 1/2॥
He who performs Agnihotra for twelve consecutive months and eats Havishyaan once on the twenty-fourth day, wearing divine garland, divine clothes, divine fragrance and divine anointing, lives happily in the Adityaloka for a long time.॥ 102-103 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥