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mahabharat 13.112.101-102h: वहाँ वह अनेक गुणों से युक्त महान विमान पर बैठकर इच्छानुसार विचरण करता है, जहाँ चाहे जाता है और अप्सराओं द्वारा पूजित होता है। उन लोकों में वह दिव्य आभूषणों से विभूषित होता है और दिव्य कुमारियों के साथ विहार करता है॥101 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.112: दरिद्रोंके लिये यज्ञतुल्य फल देनेवाले उपवास-व्रत और उसके फलका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.112.101-102h 
कामचारी कामगम: पूज्यमानोऽप्सरोगणै:।
अनेकगुणपर्यन्तं विमानवरमास्थित:॥ १०१॥
रमते देवकन्याभिर्दिव्याभरणभूषित:।
 
 
अनुवाद
वहाँ वह अनेक गुणों से युक्त महान विमान पर बैठकर इच्छानुसार विचरण करता है, जहाँ चाहे जाता है और अप्सराओं द्वारा पूजित होता है। उन लोकों में वह दिव्य आभूषणों से विभूषित होता है और दिव्य कुमारियों के साथ विहार करता है॥101 1/2॥
 
There, seated on a great plane endowed with many virtues, he moves about as he pleases, goes wherever he pleases and is worshipped by the Apsaras. In those worlds, he is adorned with divine ornaments and enjoys the company of the celestial maidens.॥101 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)