श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.111.9 
ऋषिमंगिरसं पूर्वं पृष्टवानस्मि भारत।
यथा मां त्वं तथैवाहं पृष्टवांस्तं तपोधनम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भरत! जैसे तुमने आज मुझसे यह प्रश्न पूछा है, वैसे ही मैंने भी पूर्वकाल में तपस्वी अंगिरा मुनि से पूछा था॥9॥
 
Bharata! Just as you have asked me this question today, I too had asked the ascetic Angira Muni in the past.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)