| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन » श्लोक 71 |
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| | | | श्लोक 13.111.71  | इमं तु कौन्तेय यथाक्रमं विधिं
प्रवर्तितं ह्यङ्गिरसा महर्षिणा।
पठेच्च यो वै शृणुयाच्च नित्यदा
न विद्यते तस्य नरस्य किल्बिषम्॥ ७१॥ | | | | | | अनुवाद | | हे कुन्तीपुत्र! जो मनुष्य महर्षि अंगिरा द्वारा बताई गई व्रत-विधि को प्रतिदिन पढ़ता और सुनता है, उसके पाप नष्ट हो जाते हैं ॥ 71॥ | | | | O son of Kunti! The sins of the person who daily reads and listens to the method of fasting as told by Maharishi Angira are destroyed. ॥ 71॥ | | ✨ ai-generated | | |
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