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अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन
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श्लोक 52
श्लोक
13.111.52
मासादूर्ध्वं नरव्याघ्र नोपवासो विधीयते।
विधिं त्वनशनस्याहु: पार्थ धर्मविदो जना:॥ ५२॥
अनुवाद
पुरुषसिंह! एक मास से अधिक उपवास का कोई विधान नहीं है। कुन्तीपुत्र! धार्मिक पुरुषों ने उपवास की यही विधि बताई है। 52.
Purushsingh! There is no rule of fasting for more than a month. Kunti son! The religious men have told this method of fasting. 52.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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