श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  13.111.46-47h 
हंससारसयुक्तेन विमानेन स गच्छति॥ ४६॥
पञ्चाशतं सहस्राणि वर्षाणां दिवि मोदते।
 
 
अनुवाद
वह हंसों और सारसों द्वारा खींचे जाने वाले विमान में यात्रा करता है और पचास हजार वर्षों तक स्वर्ग के सुखों का आनंद उठाता है।
 
He travels in a plane drawn by swans and cranes and enjoys the pleasures of heaven for fifty thousand years. 46 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)