श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  13.111.34 
एते तु नियमा: सर्वे कर्तव्या: शरदो दश।
द्वे चान्ये भरतश्रेष्ठ प्रवृत्तिमनुवर्तता॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! प्रवृत्तिमार्ग का अनुसरण करने वाले मनुष्य को बारह वर्ष तक इन सब नियमों का पालन करना चाहिए ॥34॥
 
Bharatshrestha! A man following the path of Pravritti should follow all these rules for twelve years. 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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