श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.111.3 
नियमांश्चोपवासांश्च सर्वेषां ब्रूहि पार्थिव।
आप्नोति कां गतिं तात उपवासपरायण:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! आप हमें व्रत का सम्पूर्ण विधान और विधि बताइए। पिताश्री! व्रत करने वाला मनुष्य किस गति को प्राप्त होता है?॥3॥
 
Prithvinath! Kindly tell us the complete rules and methods of fasting. Father! What state does a person attain who observes fast?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)