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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन
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श्लोक 20
श्लोक
13.111.20
पौषमासं तु कौन्तेय भक्तेनैकेन य: क्षिपेत्।
सुभगो दर्शनीयश्च यशोभागी च जायते॥ २०॥
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! जो मनुष्य पौष मास में एक बार भोजन करके बिताता है, वह सौभाग्यशाली, शोभायमान और यशस्वी होता है॥ 20॥
O son of Kunti! He who spends the month of Paush eating only one meal a day becomes fortunate, attractive and famous.॥ 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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