श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.111.11 
अंगिरा उवाच
ब्रह्मक्षत्रे त्रिरात्रं तु विहितं कुरुनन्दन।
द्विस्त्रिरात्रमथैकाहं निर्दिष्टं पुरुषर्षभ॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अंगिरा ने कहा - कुरुनन्दन! ब्राह्मणों और क्षत्रियों के लिए तीन रात्रि का उपवास करना विहित है। कहीं-कहीं दो रात्रि और एक दिन, अर्थात् कुल सात दिन का उपवास करने का संकेत मिलता है॥ 11॥
 
Angira said - Kurunandan! It is prescribed for Brahmins and Kshatriyas to fast for three nights. In some places, there is indication of fasting for two nights and one day, i.e. a total of seven days.॥ 11॥
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