श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.111.10 
प्रश्नमेतं मया पृष्टो भगवानग्निसम्भव:।
उपवासविधिं पुण्यमाचष्ट भरतर्षभ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे भारतभूषण! मेरे यह प्रश्न पूछने पर अग्निपुत्र भगवान अंगिरा ने मुझे व्रत की पवित्र विधि इस प्रकार बताई॥10॥
 
O Bharat Bhushan! When I asked this question, Lord Angira, the son of Agni, told me the sacred method of fasting as follows. ॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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